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मधुपुर में मंगल पांडेय की जयंती और बटुकेश्वर दत्त-नीरज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन


■ राहुल अध्ययन केंद्र में क्रांतिकारियों और साहित्यकार को किया गया नमन

रांची एक्सप्रेस संवाददाता 

मधुपुर बाजार (देवघर) : शहर के भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में रविवार


को स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों को याद किया गया। 

यहां क्रांतिकारी मंगल पांडेय की जयंती* के साथ ही क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त और प्रसिद्ध गीतकार गोपाल दास नीरज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

मौके पर उपस्थित लोगों ने तीनों विभूतियों के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

सभा को संबोधित करते हुए 'जलेस' के प्रांतीय सह-सचिव धनंजय प्रसाद ने कहा कि मंगल पांडेय 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के जुझारू नायक थे। 

उन्होंने सिपाही विद्रोह का नेतृत्व किया जिसकी चिंगारी पूरे देश में फैल गई। अंग्रेजों ने उन्हें विद्रोही करार देकर फांसी दे दी, लेकिन उनके बलिदान ने देश को आजादी की राह दिखाई।

उन्होंने कहा कि बटुकेश्वर दत्त स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारियों में से एक थे। वे भगत सिंह के साथी थे। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी हुई तो बटुकेश्वर दत्त को काला पानी की सजा दी गई। उनका जीवन देशभक्ति और त्याग का प्रतीक है।

धनंजय प्रसाद ने कहा कि गोपाल दास नीरज हिंदी साहित्य के पुरोधा और युगदृष्टा थे। लंबा संघर्ष कर उन्होंने साहित्य और फिल्मों के माध्यम से अपने गीतों को जन-जन तक पहुंचाया। पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित नीरज ने शब्दों से देश को नई चेतना दी। ऐसे महापुरुषों को भुलाया नहीं जा सकता, उन्हें याद करना हमारा दायित्व है।

कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे और कहा कि नई पीढ़ी को इन क्रांतिकारियों और साहित्यकारों के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

सभा में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।