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कवि अब्दुल रशीद रहमानी की याद में देवघर में स्मृति सम्मान समारोह, कवि गोष्ठी में गूंजी शायरी और गीत.


■ हिंदी-उर्दू के पांच भाषाओं के ज्ञाता थे रहमानी, साहित्य और समाजसेवा के लिए किया गया नमन.

रांची एक्सप्रेस संवाददाता 

बैद्यनाथधाम (देवघर) : स्थानीय दीनबंधु उच्च विद्यालय स्थित रवींद्र सभागार में सोमवार, 20 जुलाई को प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार "अब्दुल रशीद रहमानी" की स्मृति में सम्मान समारोह सह कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत रहमानी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर की गई। समारोह की अध्यक्षता प्रो. रामनंदन सिंह ने की। उन्होंने कहा कि रहमानी नेक इंसान थे। उन्हें हिंदी, उर्दू, फारसी, संस्कृत और अंग्रेजी पर समान अधिकार प्राप्त था। वे मिलनसार स्वभाव के थे और हमेशा दकियानुसी सोच से दूर रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. एन.सी. गांधी ने कहा कि रहमानी सिर्फ साहित्यकार ही नहीं, बल्कि समाजसेवी और पत्रकार भी थे।  
विशिष्ट अतिथि संदीप कुमार गोस्वामी ने उन्हें सद्भावना का प्रतीक बताते हुए कहा कि वे विभिन्न मंचों पर अपनी शायरी और कविता से लोगों को जोड़ते थे।

कार्यक्रम संयोजक धीरेंद्र छतहारवाला ने कहा कि भले ही आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी उपलब्धियों को सहेजना हमारी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर अब्दुल रशीद रहमानी के पुत्र 'अतिकुर रहमान' ने भी अपने पिता के योगदानों को याद किया।

कार्यक्रम का दूसरा सत्र कवि गोष्ठी के नाम रहा। इसमें जिले के कई कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।
एफ.एम. कुशवाहा ने देश के वर्तमान हालात पर कविता "सच मत बोलना..." सुनाई, वहीं वीरेश वर्मा के मधुर गीत ने देर तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध रखा।

इस सत्र में उमेश चरण सिन्हा, डॉ. इति, पुनीत दुबे, अनिल वर्मा, पंकज मिश्रा, रचना झा, अर्चना झा, अतिकुर रहमान, रामनंद सिंह सहित अन्य कवियों ने भी कविता पाठ किया।

समारोह में भाग लेने वाले सभी कवियों को अंगवस्त्र, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में काजल कांति सिकदार, डॉ. विजय शंकर, रवि जानाशंकर साह, बबन बदिया सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और गणमान्य लोग उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन दीनबंधु उच्च विद्यालय के काजल कांति सिकदार ने किया।