देवघर में एमवी एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन
■ बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रही है सरकारी गाड़ी.
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो
देवघर : कानून सबके लिए बराबर है का दावा करने वाले सिस्टम की पोल उस वक्त खुल गई जब झारखंड सरकार की सफेद रंग की Tata Sumo Gold देवघर की व्यस्त सड़कों पर बिना नंबर प्लेट के दौड़ती नजर आई।
तस्वीर में साफ दिख रहा है कि गाड़ी के पीछे "झारखंड सरकार" लिखा है, लेकिन नंबर प्लेट गायब है। गाड़ी में सिर्फ डीलर का स्टीकर "TIWARI AUTOMOBILES" लगा है।
क्या कहता है कानून? सुप्रीम कोर्ट सख़्त:-
1. मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 39 और 43 हर वाहन के आगे और पीछे रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगा होना अनिवार्य है। बिना नंबर प्लेट वाहन चलाना दंडनीय अपराध है।
2. केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 का नियम 50 और 51 - नंबर प्लेट का साइज, फॉन्ट और HSRP होना भी जरूरी है।
3. सुप्रीम कोर्ट 2012 - माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को आदेश दिया था कि “बिना नंबर प्लेट वाली कोई भी सरकारी या निजी गाड़ी सड़क पर नहीं चलनी चाहिए। ऐसे वाहनों पर तुरंत कार्रवाई हो।
4. सुप्रीम कोर्ट 2019 - कोर्ट ने फिर दोहराया कि “सरकारी गाड़ियों को कानून से छूट नहीं है। नियम तोड़ने पर संबंधित विभाग के अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
देवघर की सड़कों पर आम लोगों की गाड़ियों की नंबर प्लेट थोड़ी धुंधली होने पर भी ट्रैफिक पुलिस तुरंत चालान काट देती है। लेकिन वही पुलिस "झारखंड सरकार" लिखी इस गाड़ी को खुलेआम अनदेखा कर रही है।
स्थानीय लोगों का सवाल है - "जब सरकार ही कानून तोड़ेगी तो आम जनता से पालन की उम्मीद कैसे करें? कल को इस गाड़ी से कोई दुर्घटना हो जाए तो पकड़ेंगे किसे? नंबर ही नहीं है।"
बिना नंबर प्लेट की सरकारी गाड़ियां अपराध, तस्करी और अवैध कामों में इस्तेमाल होने का खतरा भी बढ़ाती हैं। ऐसे में ट्रैफिक विभाग और परिवहन विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
देवघर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता ने परिवहन सचिव, देवघर डीसी और एसपी से मांग की है कि अविलंब इस गाड़ी की पहचान कर दोषियों पर कार्रवाई हो और सभी सरकारी वाहनों की नंबर प्लेट जांच कर अभियान चलाया जाए।
वहीं दूसरी ओर आम लोगों का मानना है कि जब सरकार खुद एमवी एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ताक पर रख दे, तो फिर "सुशासन" का नारा किसके लिए है?




