करौं में 15 दिनों से बंद है मध्याह्न भोजन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की उड़ रही धज्जियां.
■ प्रभारी से मांगा गया स्पष्टीकरण, जवाब संतोषजनक नहीं होने पर वेतन होगा स्थगित.
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
करौं (देवघर) : प्रखंड के *सरकारी प्राथमिक विद्यालय, कमलकरडीह* में बीते *15 दिनों से मध्याह्न भोजन योजना पूरी तरह बंद* है। यह मामला *10 जुलाई* को मध्याह्न भोजन योजना के *कंप्यूटर ऑपरेटर राजदीप झा* और *संकुल साधनसेवी* के निरीक्षण के दौरान सामने आया।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय में *बच्चे गायब* मिले, कक्षाओं में *कुव्यवस्था* थी और परिसर में *गंदगी-कचरा* फैला हुआ था।
इस लापरवाही पर *प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी संदीप मोदी* ने विद्यालय प्रभारी *सुशील किस्कू* से लिखित *स्पष्टीकरण* मांगा है। बीपीओ ने स्पष्ट कहा कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर *प्रभारी का वेतन स्थगित* कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि *सुप्रीम कोर्ट* ने अपने कई आदेशों में कहा है कि *"विद्यालयों में एक भी दिन मध्याह्न भोजन बंद नहीं होना चाहिए।"* यह बच्चों के *पोषण और शिक्षा के अधिकार* से जुड़ा मामला है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि:
1. *हर कार्य दिवस पर गर्म पका भोजन* बच्चों को उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
2. भोजन की *गुणवत्ता और मात्रा* तय मानकों के अनुसार हो।
3. यदि किसी कारणवश भोजन नहीं मिलता है तो *वैकल्पिक व्यवस्था* या *भोजन की लागत अभिभावकों को दी जाए*।
इसके बावजूद करौं प्रखंड में कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना का *बुरा हाल* है। कई जगहों पर योजना सुचारू रूप से नहीं चल रही है, जो सीधे तौर पर *सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन* है।
बीपीओ संदीप मोदी ने कहा कि प्रखंड के सभी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन नियमित रूप से चलाया जाए। लापरवाही बरतने वाले विद्यालय प्रभारियों पर *कड़ी कार्रवाई* की जाएगी।
अब देखना होगा कि 15 दिनों से बंद मध्याह्न भोजन योजना कब तक शुरू हो पाती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।





