रेंगकर प्रखंड कार्यालय पहुंचा दिव्यांग, चार माह से राशन की गुहार; अधिकारी से मुलाकात नहीं, ट्राई साइकिल का वादा भी अधूरा
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
गिरिडीह के बेंगाबाद: सरकारी योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच सोमवार को बेंगाबाद प्रखंड कार्यालय में एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए। फिटकोरिया पंचायत के अमजो गांव निवासी 45 वर्षीय जन्मजात दिव्यांग जगदीश दास राशन बहाल कराने की गुहार लेकर करीब 100–150 मीटर तक जमीन पर रेंगते हुए और सीढ़ियां घिसटकर प्रखंड कार्यालय पहुंचे। घंटों इंतजार के बावजूद उनकी संबंधित अधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी और वे निराश होकर लौट गए।
जगदीश दास ने बताया कि पिछले चार महीनों से उन्हें राशन नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि डीलर ई-पॉस मशीन में फिंगरप्रिंट नहीं आने की बात कहकर उन्हें वापस लौटा देता है। राशन बंद होने से उनके सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है और गांव वालों की मदद से किसी तरह जीवन-यापन हो रहा है।
ट्राई साइकिल का वादा भी अधूरा
जगदीश ने बताया कि कुछ महीने पहले वे ट्राई साइकिल की मांग लेकर भी प्रखंड कार्यालय पहुंचे थे। उस समय दिव्यांगता प्रमाण पत्र में तकनीकी त्रुटि बताकर उन्हें लौटा दिया गया था। बाद में आवेदन और फोटो लेकर जल्द ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन आज तक उन्हें ट्राई साइकिल नहीं मिली।
व्यवस्था पर उठे सवाल
एक दिव्यांग व्यक्ति को राशन जैसी बुनियादी सुविधा और ट्राई साइकिल जैसी आवश्यक सहायता के लिए बार-बार प्रखंड कार्यालय तक रेंगकर आना पड़े, यह शिकायत निवारण व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि शिकायत सही है, तो इसकी तत्काल जांच कर समाधान किया जाना आवश्यक है।
एमओ ने आरोपों से किया इनकार
इस संबंध में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी नयन शेखर ने बताया कि जगदीश दास का फिंगरप्रिंट काम कर रहा है और रिकॉर्ड के अनुसार राशन का उठाव होता रहा है। उनके अनुसार केवल अप्रैल और मई माह का राशन नहीं उठाया गया, जबकि जून माह का राशन उठाया जा चुका है। उन्होंने फिंगरप्रिंट फेल होने और डीलर द्वारा गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया। साथ ही कहा कि वे पूरे दिन गोदाम में मौजूद थे, लेकिन शिकायतकर्ता उनसे मिलने नहीं आया।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि रिकॉर्ड में राशन का उठाव दर्ज है और लाभुक का दावा है कि उन्हें राशन नहीं मिला, तो वास्तविक स्थिति क्या है? इस विरोधाभास की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।




