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पाकडीह की छह एकड़ जमीन पर विवाद, ग्रामीणों ने कहा- कागजात हैं तो सार्वजनिक करें।


तीन पक्षों के बीच वर्षों तक चला जमीन का मुकदमा, समझौते के बाद हाईकोर्ट से मिली डिग्री।


जामताड़ा के पाकडीह मौजा स्थित हनुमान मंदिर के समीप करीब छह एकड़ जमीन को लेकर जारी विवाद में बुधवार को पाकडीह के ग्रामीणों ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ दिन पहले सहाना दुर्गा पूजा कमेटी के लोगों ने जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री और कब्जे को लेकर विरोध जताया था। इसके जवाब में पाकडीह के ग्रामीणों ने दावा किया कि उनके पास जमीन से संबंधित पूरे कागजात हैं। उन्होंने सहाना के लोगों से भी जमीन पर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की। ग्रामीण नारायण मंडल ने बताया कि कुछ दिन पहले सहाना के कुछ लोग पाकडीह आए थे और जमीन को देवी दुर्गा मां  की जमीन बता रहे थे। उन्होंने कहा कि उक्त जमीन केशव चंद्र दत्ता की थी। उनके अनुसार, केशव चंद्र दत्ता विकलांग और कुष्ठ रोग से पीड़ित थे, सहाना में कुछ लोगों ने उन्हें वहां से निकाल दिया था, जिसके बाद उनके दादाजी ने उन्हें शरण दी थी। नारायण मंडल ने दावा किया कि उनके दादाजी ही उनका खाना-पीना और भरण-पोषण करते थे। उन्होंने बताया कि केशव चंद्र दत्ता की मृत्यु के बाद तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी ने केस नंबर 18/1968-69 में जमीन को फौती करार किया था। इसके बाद सहाना, पाकडीह और उनके परिवार के लोगों ने जमाबंदी रैयत होने तथा भूमिहीन होने के आधार पर जमीन पर अपना-अपना दावा किया। नारायण मंडल के अनुसार, अनुमंडल पदाधिकारी ने जांच के बाद सहाना के कुछ लोगों के दावे खारिज किए, जबकि पाकडीह के विजय बाउरी और पोचा बाउरी को डिग्री दी गई। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त डिग्री के खिलाफ वे दुमका उपायुक्त के पास गए, जिसके बाद उन्हें पुनः डिग्री मिली। इसके बाद तीसरे पक्ष ने भी उपायुक्त के समक्ष अपील की। नारायण मंडल के अनुसार, इस तरह करीब 60 वर्षों तक जमीन को लेकर कभी एक पक्ष तो कभी दूसरे पक्ष और कभी तीसरे पक्ष के पक्ष में डिग्री होती रही। उन्होंने कहा कि इस दौरान सहाना के लोगों ने कभी यह दावा नहीं किया कि जमीन उनकी है।नारायण मंडल ने आगे बताया कि बाद में कमिश्नर के यहां से नजरुल अंसारी को संपूर्ण जमाबंदी नंबर सात की जमीन की डिग्री दी गई। इसके खिलाफ ग्रामीणों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कहा कि मामला लंबे समय तक चलने के बाद तीनों पक्षों ने आपसी समझौता किया। इसके तहत अमीन बुलाकर जमीन की मापी कराई गई और नक्शा तैयार किया गया। नारायण मंडल के अनुसार, हाईकोर्ट ने समझौते को स्वीकार करते हुए ग्रामीणों के पक्ष में डिग्री दी। ग्रामीणों ने कहा कि उनके पास फोती करार, जमीन की मापी और हाईकोर्ट के फैसले से संबंधित कागजात मौजूद हैं। उन्होंने सहाना दुर्गा पूजा कमेटी के लोगों से कहा कि यदि जमीन दुर्गा मां की है, तो उसके समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करें। नारायण मंडल ने यह भी मांग की कि यदि जमीन दुर्गा मां के नाम पर है या उनके किसी वंशज का दावा है, तो उसका भी कागजात के साथ खुलासा किया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि जमीन को लेकर किसी भी तरह का विवाद बढ़ाने के बजाय संबंधित पक्षों को अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज सामने रखने चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने प्रशासन से भी जमीन के कागजात और पूर्व के न्यायिक आदेशों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।