शिक्षक दिवस पर ‘समृद्धि की पाठशाला’ की अनूठी पहल, बच्चों की माताओं को किया सम्मानित
मेदिनीनगर : शिक्षक दिवस के अवसर पर मिशन समृद्धि द्वारा संचालित निःशुल्क ‘समृद्धि की पाठशाला’ में एक अनूठी पहल देखने को मिली। शिक्षकों के साथ-साथ उन माताओं को भी सम्मानित किया गया, जो बच्चों की पहली शिक्षिका होती हैं। संस्था ने विशेष रूप से उन माताओं को सम्मान दिया, जिनके बच्चे पाठशाला में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
संस्था की अध्यक्ष शीला श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान तो होता ही है, लेकिन बच्चों की प्रथम शिक्षिका माताओं का सम्मान भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों से संस्था वंचित वर्ग के बच्चों और उनके परिवारों को शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पहले इन परिवारों में बच्चों की पढ़ाई से अधिक उन्हें बकरी-गाय चराने अथवा मजदूरी जैसे कामों में लगाना जरूरी समझा जाता था। हालांकि अब धीरे-धीरे परिवारों का सहयोग और बच्चों की शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी पूर्ण सफलता नहीं मिली है, लेकिन संस्था ने हिम्मत नहीं हारी है। ‘समृद्धि की पाठशाला’ के बच्चों में किसी की मां सिलाई करती हैं, तो किसी के पिता ऑटो चलाते हैं। अधिकांश बच्चों की माताएं घरेलू काम करती हैं और पिता मजदूरी करते हैं। शिक्षक दिवस पर काम की व्यस्तता के कारण सभी माताएं कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकीं, लेकिन जो माताएं उपस्थित रहीं, उनके विचारों और संस्था के प्रति विश्वास ने सभी को भावुक कर दिया। माताओं ने अपने बच्चों को आगे भी नियमित रूप से पाठशाला भेजने का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम में पाठशाला को निरंतर सहयोग देने के लिए नैंसी गुप्ता, आशा शर्मा, बैजन्ती गुप्ता और वीणा राज को भी सम्मानित किया गया। संस्था की ओर से बताया गया कि आने वाले दिनों में अन्य सहयोगियों एवं अभिभावकों को भी सम्मानित किया जाएगा। संस्था ने कहा कि इन माताओं का सम्मान करना उसके लिए गौरव की बात है और इससे बच्चों की शिक्षा के प्रति परिवारों में और सकारात्मक माहौल तैयार होगा।

