विशेष प्रसादम योजना हुई फेल, 05 साल में सिर्फ 200 श्रद्धालुओं तक पहुंचा बाबा का प्रसाद.
■ 251-501 रुपये में घर बैठे प्रसाद का वादा, प्रचार के अभाव में दम तोड़ रही योजना.
अमित कुमार
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो
देवघर : देश के कोने-कोने में बैठे श्रद्धालुओं को बाबा बैद्यनाथधाम का प्रसाद घर बैठे पहुंचाने के लिए डाक विभाग ने साल 2021 में 'विशेष प्रसादम योजना' शुरू की थी। लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी यह योजना पूरी तरह फेल साबित हुई है।
विभागीय आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं। पिछले 05 वर्षों में इस योजना का लाभ 150 से 200 श्रद्धालुओं ने ही उठाया है। यानी जिस योजना से लाखों श्रद्धालुओं को जोड़ने का सपना देखा गया था, वह आंकड़ों में सिर्फ कुछ हजार रुपये के प्रसाद तक सिमट कर रह गई।
इस योजना के तहत श्रद्धालुओं को 251 या 501 रुपये का मनीऑर्डर देवघर मुख्य डाकघर भेजना होता है। इसके बाद डाक विभाग एक निजी कंपनी के जरिए प्रसाद भेजता है।
251 रुपये में करीब 250 ग्राम और 501 रुपये में 500 ग्राम प्रसाद मिलता है। पैकेट में पेड़ा, चूड़ा, भभूत, सिंदूर, भगवान शिव का चित्र और अन्य पूजन सामग्री शामिल होती है।
क्यों फेल हुई योजना?
1. प्रचार-प्रसार का घोर अभाव - डाक अधीक्षक एसके मिश्रा ने खुद माना कि योजना का अपेक्षित प्रचार नहीं हुआ।
2. जानकारी का अभाव - देशभर के अधिकांश श्रद्धालुओं को इस योजना के बारे में पता ही नहीं है।
3. सीमित पहुंच - योजना शुरू हुए 5 साल हो गए, लेकिन होटल, चौक-चौराहों और सोशल मीडिया पर इसका कोई बड़ा प्रचार नहीं दिखा।
अब जाकर विभाग को होश आया है। डाक अधीक्षक ने बताया कि अब स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। श्रावणी मेले में पंडा समाज के माध्यम से यजमानों के व्हाट्सएप ग्रुप में जानकारी भेजी जाएगी। साथ ही शहर के होटलों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाए जाएंगे।
सवाल: 5 साल बाद आखिर क्यों याद आई ?
लोगों का सवाल है कि जब योजना 2021 से चल रही थी तो अब तक व्यापक प्रचार क्यों नहीं किया गया? अगर पहले से प्रचार होता तो डाक विभाग को भी राजस्व मिलता और दूर बैठे श्रद्धालुओं को भी बाबा का आशीर्वाद।
अब देखना होगा कि डाक विभाग का यह "देर से आया जागरूकता अभियान" 'विशेष प्रसादम योजना' को नई जिंदगी दे पाता है या यह कागजों में ही दफन होकर रह जाती है।





